21 मई 2011

डेविड, बेन योसेफ, हर-सियोन, जिन्हें प्रभुजी के नाम से जाना जाता है, एक लेखक, चित्रकार और अवधूत रहस्यवादी हैं। 2011 में, उन्होंने समाज से रिटायर होने का और एक साधु का जीवन जेने का फैसला किया था। वह अपना दिन, प्रार्थना करने में, पढ़ने में, लिखने में, चित्रकारी करने में, और एकांत में ध्यान लगाने में बिताते हैं। प्रभुजी सामुदायिक सेवा की परोपकारी गतिविधि की निगरानी करते रहते हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं।

प्रभुजी अपने आध्यात्मिक विकास में दो पवित्र आध्यात्मिक गुरुओं के योगदान का शुक्रियादा करते हैं: H.D.G. भक्तिकवि अतुलानंद आचार्य स्वामी महाराज, H.D.G. के शिष्य A.C. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद, और H.D.G. अवधूत श्री ब्राह्मणानंद बाबाजी महाराज, H.D.G. के शिष्य अवधूत श्री मस्तराम बाबाजी महाराज।

हालाँकि कई लोग उन्हें एक प्रबुद्ध व्यक्ति मानते हैं, लोगों ने सालों तक प्रभुजी को धार्मिक अधिकार की भूमिका निभाने के लिए कहा लेकिन उन्हें यह स्वीकार नहीं है।

प्रभुजी उपदेशक, मार्गदर्शक, शिक्षक, प्रशिक्षक, प्रबुद्ध, शिक्षाशास्त्री, इंजीलवादी, रब्बी, पॉस्क हलाचा, आरोग्यसाधक, चिकित्सक, सत्संग करने वाला, नेता, चैनलर (मध्यम), उद्धारकर्ता, या गुरु होने का दावा नहीं करते हैं। वह न तो किसी को धर्म बदलने के लिए कहते हैं और न ही किसी को कुछ समझाने की कोशिश करते हैं। अनुयायियों, या किसी भी प्रकार के प्रशंसकों को आकर्षित करने का उनका कोई इरादा नहीं है।

पंद्रह सालों (1995–2010) तक, प्रभुजी ने कुछ संन्यासी शिष्यों को स्वीकार किया जिन्होंने साफ तौर पर दीक्षा का अनुरोध किया। 2010 में, उन्होंने संन्यासी शिष्यों, अनुयायियों, भक्तों, और यहाँ तक कि आगंतुकों को भी स्वीकार नहीं करने का अटल निर्णय लिया।

प्रभुजी सार्वजनिक गतिविधियों से रिटायर हो चुके हैं और सत्संग, सार्वजनिक व्याख्यान, बैठकें, रिट्रीट्स, सेमिनार, सभा या कोर्स की पेशकश नहीं करते हैं। इस समय, वह केवल उन शिष्यों के एक छोटे समूह से निजी तौर पर बातचीत करते हैं जिन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु के साथ रहने का फैसला किया है।

हम सभी से उनकी निजता का सम्मान करने और उन्हें किसी भी वजह से परेशान न करने का विनम्र निवेदन करते हैं। इंटरव्यू, आशीर्वाद, शक्तिपात, या दीक्षा मांगने के लिए कृपया उनसे संपर्क करने की कोशिश न करें।

हम प्रभुजी के दृष्टिकोण को केवल किताबों, चित्रों, कविताओं, धुनों, वेबसाइटों, मंचों और शिष्यों द्वारा फिल्माए गए निजी वार्ता के ज़रिये साझा करते हैं।

इस वेबसाइट को स्वयं प्रभुजी द्वारा नहीं संभाला जाता बल्कि उनके कुछ शिष्यों और मित्रों द्वारा संभाला जाता है, जिन्हें लगता है कि उनका सामूहिक कर्तव्य प्रभुजी की विरासत को संरक्षित और बनाए रखने के लिए साइट को बनाए रखना ज़रूरी है।